YogaWithRamdev : हरिद्वार, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हरिद्वार में आयोजित अनन्तश्रीविभूषित परम गुरुदेव श्री स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी महाराज के गुरुदेव समाधि मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा, मूर्ति स्थापना समारोह एवं संत समागम कार्यक्रम में सहभागिता कर संत समाज से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर आध्यात्मिक वातावरण, साधना और संस्कार की अनुभूति देखने को मिली।
YogaWithRamdev : सीएम का योगगुरु स्वामी रामदेव के साथ योगाभ्यास
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पतंजलि योगपीठ में योगगुरु स्वामी रामदेव के साथ योगाभ्यास भी किया। सीएम डॉ. यादव ने मयूरासन, शीर्षासन सहित कई कठिन योगासनों को सहजता से कर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। योगाभ्यास के बाद उन्होंने कहा कि कन्या गुरुकुल का संस्कारयुक्त और साधनापूर्ण वातावरण मन को अपार शांति और आत्मबल प्रदान करता है।

YogaWithRamdev मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योग भारत की प्राचीन परंपरा से निकलकर आज वैश्विक जन-आंदोलन बन चुका है। उन्होंने आमजन से योग को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
YogaWithRamdev : परंपरागत चिकित्सा से समग्र स्वास्थ की और बढ़ता मध्य प्रदेश
आपको बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार विरासत से विकास के विज़न के तहत आयुर्वेद, योग और सनातन स्वास्थ्य परंपराओं को सशक्त करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। बीते दो वर्षों में प्रदेश में 8 नए आयुर्वेद महाविद्यालयों को स्वीकृति दी गई है, जबकि 12 आयुष एवं वेलनेस केंद्रों की स्थापना को मंजूरी देकर वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है।


YogaWithRamdev मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहचान एक ऐसे नेतृत्व के रूप में उभरी है, जिसमें प्रशासनिक दक्षता और सांस्कृतिक चेतना का अनोखा संतुलन दिखाई देता है। प्रशासन पर उनकी पकड़ जितनी मजबूत है, उतनी ही गहरी उनकी सनातन और वैदिक परंपराओं से जुड़ाव की भावना भी है। निर्णय लेने में स्पष्टता, कार्यान्वयन में गति और व्यवस्था पर नियंत्रण उनकी प्रशासनिक विशेषताओं में शामिल हैं।

YogaWithRamdev सीएम डॉ. यादव केवल नीतियों तक सीमित नेता नहीं हैं, बल्कि वे परंपराओं को जीने वाले व्यक्तित्व के रूप में भी जाने जाते हैं। व्यायाम शाला में पहलवानी और शस्त्रों का संचालन से जुड़ी उनकी स्मृतियां और अवसर मिलने पर लाठी-प्रदर्शन आज भी उनकी सांस्कृतिक जड़ों को दर्शाता है, जो विशेषकर उज्जैन प्रवास के दौरान जनमानस को आकर्षित करता है। उनका नेतृत्व आधुनिक विकास और प्राचीन विरासत के समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करता है। यही गुण उन्हें जनता से भावनात्मक रूप से जोड़ता है और एक विशिष्ट पहचान देता है।

