Report: Somnath mishra
Jabalpur जबलपुर स्थित वाहन निर्माणी (VFJ) ने रक्षा क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। वर्ष 1972 में तैयार किए गए दो टी-72 बैटल टैंकों को पूरी तरह ‘ओवरहॉल’ (कायाकल्प) कर फिर से युद्ध के लिए तैयार कर दिया गया है। जब इन टैंकों के इंजन स्टार्ट हुए, तो उनकी गर्जना ने 53 साल पुराने उसी जोश और ताकत का अहसास कराया। लेफ्टिनेंट जनरल अमरदीप सिंह औजेला ने बुधवार को एक विशेष समारोह में हरी झंडी दिखाकर इन टैंकों को सेना के लिए रवाना किया।
पायलट प्रोजेक्ट की बड़ी सफलता: एक-एक पुर्जा हुआ दुरुस्त
Jabalpur आर्म्ड व्हीकल निगम लिमिटेड (AVNL) की इकाई ‘व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर’ को पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। विशेषज्ञों की टीम ने टैंक के हर एक बारीक कलपुर्जे को खोलकर उसे आधुनिक मानकों के अनुसार रिपेयर और अपग्रेड किया। समारोह के दौरान AVNL के सीएमडी संजय द्विवेदी और अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी में इन टैंकों को ‘रोल आउट’ किया गया। यह सफलता दर्शाती है कि पुरानी तकनीक को भी आधुनिक कौशल से नया जीवन दिया जा सकता है।
VFJ बनेगा टैंक ओवरहॉलिंग का नया हब
Jabalpur भारतीय सेना की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए अब जबलपुर की इस फैक्ट्री को टैंकों की ओवरहॉलिंग के लिए स्थाई केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, अब प्रतिवर्ष सेना से 8 से 10 टैंक ओवरहॉलिंग के लिए यहाँ भेजे जाएंगे। इसके लिए निर्माणी परिसर में अत्याधुनिक टेस्टिंग सेटअप और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में यहाँ काम का दबाव और गौरव दोनों बढ़ेंगे।
समय सीमा और गुणवत्ता का बेजोड़ संगम
Jabalpur मुख्य महाप्रबंधक प्रवीण कुमार ने बताया कि इन टैंकों का कायाकल्प न केवल निर्धारित समय के भीतर किया गया, बल्कि सेना के हर कड़े मानक (पैरामीटर) पर इन्हें परखा भी गया है। इस सफल प्रोजेक्ट के बाद अब फैक्ट्री को भविष्य में बड़े वर्क ऑर्डर मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। टी-72 जैसे शक्तिशाली टैंकों की कार्यक्षमता बढ़ने से भारतीय सेना की जमीनी ताकत को और अधिक मजबूती मिलेगी।





