BY
Yoganand Shrivastava
Bhopal शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच चल रहा टकराव अब और गहरा गया है। एक तरफ जहाँ पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती शंकराचार्य के सम्मान की बात कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर अयोध्या के संत परमहंस महाराज ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाकर मामले को नया मोड़ दे दिया है।

“प्रशासन ने मर्यादा तोड़ी” – उमा भारती का रुख
Bhopal बीजेपी की फायरब्रांड नेता उमा भारती ने इस विवाद में कूदते हुए सीधे तौर पर मेला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य जैसे उच्च पद पर आसीन संत से उनकी पदवी या पहचान का सबूत मांगना निंदनीय है। उमा भारती के अनुसार, प्रशासन ने संतों के प्रति अपनी मर्यादा का उल्लंघन किया है, जिससे सनातन समाज में गलत संदेश गया है।
मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा किंतु प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांगना, यह प्रशासन ने अपनी मर्यादाओं एवं अधिकारों का उल्लंघन किया है, यह अधिकार तो सिर्फ शंकराचार्यों…
— Uma Bharti (@umasribharti) January 27, 2026
परमहंस महाराज की मांग: अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे NSA
Bhopal विवाद का दूसरा पक्ष तब और उग्र हो गया जब अयोध्या के परमहंस दास महाराज ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि:
- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगाया जाए।
- उनके माघ मेले में प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाए। परमहंस महाराज का आरोप है कि शंकराचार्य के कृत्यों से मेले की व्यवस्था और शांति भंग हो रही है।
प्रशासन बनाम शंकराचार्य
Bhopal यह पूरा मामला माघ मेले में शंकराचार्य के शिविर और उनके शिष्यों के साथ हुई कथित बदसलूकी से शुरू हुआ था। प्रशासन द्वारा उनकी पहचान और दावों पर सवाल उठाने के बाद से ही संतों के बीच दो फाड़ की स्थिति बन गई है। जहाँ एक गुट इसे ‘संतों का अपमान’ बता रहा है, वहीं दूसरा गुट इसे ‘प्रशासनिक नियमों के उल्लंघन’ के तौर पर देख रहा है।
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