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Village of Soldiers: हर तीसरे घर से फौजी, बरना गांव बना ‘सैनिकों का गांव’, 150 से ज्यादा जवान सेना में

Village of Soldiers

Report by: Gurdeep Singh, Edit by: Priyanshi Soni

Village of Soldiers: 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर हम हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के उस गांव में पहुंचे, जिसे पूरे इलाके में ‘सैनिकों का गांव’ कहा जाता है। यह गांव है बरना, जहां हर तीसरे घर से एक जवान भारतीय सेना में सेवा दे रहा है। गांव से अब तक करीब 150 से 200 युवा सेना में भर्ती हो चुके हैं या वर्तमान में देश की सीमाओं पर तैनात हैं।

Village of Soldiers: गांव-गांव में गूंजती देशभक्ति की मिसाल

ग्रामीणों का कहना है कि बरना गांव में देशभक्ति की भावना पीढ़ियों से चली आ रही है। यहां के युवाओं में शुरू से ही सेना में भर्ती होने का जुनून रहा है। गांव में कई जवान रिटायर होकर लौट चुके हैं, जबकि कई आज भी सीमा पर तैनात होकर देश की रक्षा कर रहे हैं। ग्रामीणों को इस बात पर गर्व है कि उनके गांव के हर तीसरे घर से एक सैनिक निकलता है।

Village of Soldiers: शहीद सुरेंद्र सिंह ने दिलाई गांव को पहचान

बरना गांव के रहने वाले शहीद सुरेंद्र सिंह वर्ष 2001 में जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे।
शहीद सुरेंद्र के पिता रोनकी राम ने बताया कि सुरेंद्र मात्र 18 वर्ष की उम्र में सेना में भर्ती हुए थे और 23 साल की उम्र में देश के लिए शहादत दी। उन्होंने सेना में करीब 5 वर्षों तक सेवा दी।

शहीद सुरेंद्र की कुर्बानी के बाद बरना गांव को एक नई पहचान मिली और यह गांव ‘सैनिकों का गांव’ के नाम से जाना जाने लगा।

Village of Soldiers: तीन वीर सपूतों की शहादत पर गांव को गर्व

बरना गांव के अब तक तीन सैनिक देश के लिए शहीद हो चुके हैं।
शहीद सुरेंद्र सिंह, शहीद लखी राम और एक अन्य वीर जवान ने अलग-अलग समय पर देश की सेवा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर किए। गांव आज भी इन शहीदों की कुर्बानियों को गर्व से याद करता है।

Village of Soldiers: रिटायर्ड फौजियों ने साझा किए अनुभव

गांव के रिटायर्ड फौजी गुरमीत सिंह ने बताया कि शहीद सुरेंद्र की शहादत से प्रेरित होकर उन्होंने भी सेना में भर्ती होकर देश सेवा का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि पहले गांव के युवाओं में सेना को लेकर जबरदस्त क्रेज था, लेकिन अब युवाओं का रुझान विदेश जाने की ओर बढ़ रहा है।

Village of Soldiers: माइन ब्लास्ट में घायल हुए फौजी प्रयास

रिटायर्ड फौजी प्रयास वर्ष 2012 में सेना में भर्ती हुए थे। ड्यूटी के दौरान माइन ब्लास्ट में घायल होने के बाद उन्हें मेडिकल पेंशन पर भेज दिया गया।
उन्होंने बताया कि आज भी उनके दिल में देश सेवा का जज्बा है, लेकिन मजबूरीवश वह अब सेवा नहीं कर सकते।

Village of Soldiers: अग्निवीर योजना से कम हुआ युवाओं का रुझान

शहीद सुरेंद्र के पिता, रिटायर्ड फौजी और गांव के कई बुजुर्गों का मानना है कि अग्निवीर योजना के बाद युवाओं में सेना के प्रति रुचि पहले जैसी नहीं रही।
उनका कहना है कि जहां पहले गांव की सड़कों पर सुबह-सुबह दौड़ लगाने वाले युवाओं की कतार लगती थी, वहीं अब कई युवा विदेश जाने की तैयारी में जुटे हैं।

Village of Soldiers: आज भी जिंदा है देशभक्ति की भावना

हालांकि, रिटायर्ड फौजी राजेंद्र सिंह और गांव के पंच सुभाष चंद्र का कहना है कि बरना गांव के युवाओं में आज भी देशभक्ति की भावना जिंदा है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में एक बार फिर यह गांव सेना को बड़ी संख्या में जवान देगा और देश सेवा की परंपरा यूं ही जारी रहेगी।

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