Bhojshala peaceful worship : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को दी बसंत पंचमी की शुभकामनाएं
रिपोर- उपेंद्र कुमावत
Bhojshala peaceful worship : धार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के तहत शासन-प्रशासन ने पहले से तैयार की गई विस्तृत कार्ययोजना को ज़मीन पर पूरी सख़्ती और संवेदनशीलता के साथ लागू किया। भोजशाला में इस बार बसंत पंचमी का आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सुशासन, अनुशासन और प्रशासनिक दक्षता का उदाहरण बनकर सामने आया। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।
दर्शन से लेकर प्रवेश-निकासी, भीड़ प्रबंधन, पेयजल, चिकित्सा और निगरानी तक हर स्तर पर प्रशासन और पुलिस के बेहतर समन्वय ने यह सुनिश्चित किया कि भोजशाला में पूजा आयोजन शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और मर्यादित रूप से संपन्न हो। वरिष्ठ अधिकारियों की 24×7 फील्ड मॉनिटरिंग और रियल-टाइम फीडबैक से व्यवस्थाएं लगातार मजबूत होती रहीं। यही कारण है कि इस वर्ष शांति, अनुशासन और आपसी सौहार्द के साथ संपन्न हुआ। मां वाग्देवी सरस्वती के दर्शन और पूजन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सर्व हिन्दू समाज ने उत्साह के साथ पूजा-अर्चना की, वहीं प्रशासन की कड़ी निगरानी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन से सुबह 3:30 बजे तक पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

बसंत पंचमी के अवसर पर भोजशाला में लंबे समय बाद ऐसा दृश्य देखने को मिला, जब धार्मिक आस्था और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों ने मिलकर एक सफल आयोजन को अंजाम दिया। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, नियंत्रित प्रवेश और समयबद्ध दर्शन व्यवस्था ने किसी भी तरह की अव्यवस्था को पनपने नहीं दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बसंत पंचमी पर देश और प्रदेशवासियों को बहुत बधाई और शुभकानाएं दी.
Bhojshala peaceful worship : युवाओं में दिखा विशेष उत्साह
मां सरस्वती के दर्शन के लिए केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि युवाओं में भी खासा उत्साह देखने को मिला। हाथों में पीले वस्त्र, माथे पर तिलक और “जय मां वाग्देवी” के जयकारों के साथ श्रद्धालु भोजशाला पहुंचे। युवाओं ने इसे केवल पर्व नहीं, बल्कि संस्कृति और विरासत से जुड़ने का अवसर बताया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां सरस्वती की पुनर्स्थापना और भोजशाला मुक्ति के संकल्प को भी दोहराया। हालांकि सभी गतिविधियां सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही रहीं।

Bhojshala peaceful worship : प्रशासन की मुस्तैदी बनी सफलता की कुंजी
इस वर्ष बसंत पंचमी के आयोजन को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। पुलिस, प्रशासन और खुफिया एजेंसियों ने पहले से ही संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए रणनीति तैयार की थी। सीसीटीवी निगरानी, बैरिकेडिंग, अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग, तथा पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई।
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूरी सख्ती से पालन कराया गया, जिससे किसी भी पक्ष को नियमों से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। इसी वजह से कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।
Bhojshala peaceful worship : नमाज भी शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न
भोजशाला परिसर में बसंत पंचमी के साथ-साथ नमाज भी शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। प्रशासन ने दोनों पक्षों के समय और स्थान को लेकर स्पष्ट व्यवस्था की थी, जिससे किसी प्रकार का टकराव या तनाव की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। यह आयोजन इस बात का उदाहरण बना कि संविधान, न्यायालय और प्रशासनिक नियमों के दायरे में रहकर धार्मिक गतिविधियां शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकती हैं।

Bhojshala peaceful worship : भोज उत्सव समिति का बयान
भोज उत्सव समिति के सदस्य दीपेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि इस वर्ष का आयोजन ऐतिहासिक रहा। उन्होंने कहा, हमने प्रशासन का पूरा सहयोग किया और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन किया। हमारा उद्देश्य आस्था के साथ-साथ शांति बनाए रखना है। स्वदेश न्यूज रिपोर्टर उपेंद्र कुमावत के अनुसार, पूरे आयोजन के दौरान कहीं भी तनाव की स्थिति नहीं बनी, जो प्रशासन और समाज दोनों की परिपक्वता को दर्शाता है।
Bhojshala peaceful worship : सौहार्द का संदेश
भोजशाला में इस वर्ष का बसंत पंचमी आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह सौहार्द, संयम और कानून के सम्मान का संदेश भी दे गया। जिस स्थल को लेकर वर्षों से विवाद रहा है, वहां शांतिपूर्ण आयोजन होना अपने-आप में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत, प्रशासन की सख्ती और समाज की समझदारी से भोजशाला में बसंत पंचमी 2026 पूरी तरह सफल और शांतिपूर्ण रही। यह आयोजन साबित करता है कि यदि आस्था के साथ अनुशासन जुड़ जाए, तो संवेदनशील से संवेदनशील मुद्दों पर भी शांति कायम रखी जा सकती है।

