हास्य हथौड़ा, हमने अपना ही सिर फोड़ा 😀
Hasya Hathauda हमारी संस्कृति को दुनिया की सबसे समृद्धशाली संस्कृति कहा जाता है।
हम भारत के लोग खुद को सबसे संस्कारी कहलाना पसंद करते हैं।
लेकिन सच यह है कि हम अपने संस्कार घर से निकलने से पहले ताक पर रख देते हैं।
घर से बाहर कदम रखते ही सबसे पहले सामना होता है, हरी बत्ती पार करते एक राहगीर से।
दिमाग में गुस्सा भड़कता है, मन में गालियाँ उमड़ती हैं लेकिन हम बुदबुदाकर ही रह जाते हैं।
क्योंकि हम संस्कारी हैं।

Hasya Hathauda आगे बढ़ते हैं तो ट्रैफिक की दुश्वारियाँ इंतज़ार कर रही होती हैं। कभी सिग्नल लांघना,
कभी गाड़ी तेज दौड़ाकर सामने वाले को कट मारना, सब जायज़ लगता है, क्योंकि ऑफिस को देर हो रही है।
ऑफिस पहुँचते ही बॉस की गुर्राती शक्ल दिखती है। हम मुस्कुराते हैं, अपने चेहरे पर मासूमियत का नकाब चढ़ाते हैं
और टेबल पर निढाल होकर बैठ जाते हैं। फिर एक सामूहिक आह ! निकलती है, “कितना मुश्किल हो गया है, घर से ऑफिस आना। खुद को कोसना, व्यवस्था को गरियाना, रोज़ का सगल बन चुका है।
Hasya Hathauda ऑफिस आते ही चाय पीने चंदावली की दुकान पर चले जाना, साथियों के साथ गपशप मारना, बड़ी-बड़ी डींगें हाँकना, अब आदत नहीं, लत बन चुकी है।
Hasya Hathauda तभी लंच टाइम की घंटी बज जाती है। दो घंटे लंच में निकल जाते हैं। टेबल पर पड़ी फाइल को दो बार खोलकर देखते हैं, लेकिन आज मन नहीं है कि यह फाइल आगे वाली विंडो में डाली जाए। नतीजा? एक दिन और जुड़ गया। आम आदमी का इंतज़ार और बढ़ गया, और आम आदमी भी मान चुका है, सिस्टम ऐसे ही चलता है। हम भी मान चुके हैं। क्योंकि हम संस्कारी हैं। संस्कार ताक में रखकर घर से निकलते हैं।
Hasya Hathauda अब ऑफिस से छुट्टी का समय हो गया। काम-धाम तो अपनी जगह है, ऑफिस में बड़ा आराम मिल गया। लेकिन मुए रास्ते का ट्रैफिक ! जगह-जगह जाम, रास्ते से निकलना हराम। तभी सामने ट्रैफिक पुलिस के डंडे का विराम। पूछा, हेलमेट क्यों नहीं लगाया, जनाब? हमने कहा हेलमेट का क्या काम, जब रास्ता रोज़ ही रहता है जाम !
Hasya Hathauda ट्रैफिक पुलिस बोली, रसीद कटेगी। हमने नीचे से पचास का नोट खिसकाया। मन ही मन बुदबुदाए, काम-धाम छोड़कर हर शाम वसूली पर उतर आते हैं। फिर व्यवस्था को गरियाया, सिस्टम को कोसा और खुद को सही ठहराया। क्योंकि हम भारत के लोग, सबसे संस्कारी कहलाना पसंद करते हैं, लेकिन उन संस्कारों को घर से निकलने से पहले ताक में रख देते हैं।

