By Vijay Nandan
Maharashtra Municipal Election : महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने राज्य की राजनीति की दिशा और दशा दोनों को स्पष्ट कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने इन चुनावों में जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उसने न सिर्फ़ सहयोगी दलों बल्कि विपक्ष को भी नए सिरे से रणनीति पर सोचने को मजबूर कर दिया है। सबसे बड़ा झटका राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों धड़ों, अजित पवार और शरद पवार को लगा है, जिनकी राजनीतिक पकड़ कई क्षेत्रों में कमजोर होती दिखाई दी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दावा किया है कि महायुति ने 29 में से 25 नगर निगमों में जीत हासिल की है। इसे उन्होंने जनता का “भारी जनादेश” बताया।
Maharashtra Municipal Election : मुंबई में बदला सत्ता संतुलन
देश के सबसे समृद्ध नगर निगम बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में इस बार तस्वीर बदली हुई नजर आई। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को 65 सीटें मिलीं, जबकि एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना 29 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस को 24 सीटों से संतोष करना पड़ा।
बीएमसी पर बीते ढाई दशकों से शिवसेना का दबदबा रहा है, लेकिन इस बार पहली बार ठाकरे परिवार को यहां सत्ता से बाहर होना पड़ा। यह बदलाव महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।

Maharashtra Municipal Election : पवार परिवार के लिए अस्तित्व की चुनौती
चुनावी नतीजों में सबसे कमजोर प्रदर्शन एनसीपी के दोनों धड़ों का रहा। शरद पवार की एनसीपी (एसपी) कई नगर निगमों में खाता तक नहीं खोल सकी। भिवंडी-निजामपुर में उन्हें 12 सीटें मिलीं, जबकि राज्य के अन्य हिस्सों में पार्टी का प्रदर्शन बेहद सीमित रहा।
अजित पवार गुट को भी उम्मीद के मुताबिक समर्थन नहीं मिला। पुणे और पिंपरी-चिंचवड जैसे क्षेत्रों में, जहां उन्होंने बीजेपी के खिलाफ आक्रामक प्रचार किया था, वहां भी हार का सामना करना पड़ा। अजित पवार ने नतीजों को स्वीकार करते हुए कहा कि वह जनता के फैसले का सम्मान करते हैं।

Maharashtra Municipal Election : कांग्रेस और ठाकरे गुट की स्थिति
कांग्रेस ने दावा किया है कि उसने कुल 350 सीटें जीती हैं और कई नगर निगमों में संयुक्त रूप से सत्ता में भागीदार बनेगी। चंद्रपुर में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि पार्टी ने बीजेपी पर धनबल और कथित फर्जी मतदान के आरोप भी लगाए हैं।
उद्धव ठाकरे की शिवसेना मुंबई में मजबूत विपक्ष के रूप में उभरी है। मराठी वोट बैंक के कुछ इलाकों—दादर, माहिम और परेल में ठाकरे बंधुओं की एकजुटता का असर दिखा, जहां शिंदे गुट को नुकसान हुआ।

Maharashtra Municipal Election : राज ठाकरे का घटता प्रभाव
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के लिए ये चुनाव निराशाजनक रहे। मुंबई में पार्टी को सिर्फ छह सीटें मिलीं और पूरे राज्य में कुल 12 सीटों पर ही जीत दर्ज हो सकी। कभी नासिक जैसे शहरों में सत्ता संभाल चुकी एमएनएस का प्रभाव अब सीमित क्षेत्रों तक सिमटता नजर आ रहा है।
Maharashtra Municipal Election : नतीजों का राजनीतिक संदेश
इन चुनावों ने साफ कर दिया है कि महाराष्ट्र की राजनीति में बीजेपी का दबदबा और मजबूत हुआ है। महायुति के भीतर भी शक्ति संतुलन बीजेपी के पक्ष में झुकता दिख रहा है। वहीं महाविकास आघाड़ी के भविष्य और क्षेत्रीय दलों की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े हो गए हैं। बीएमसी जैसे बड़े नगर निगम के नतीजों को अक्सर आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों का संकेतक माना जाता है। ऐसे में ये नतीजे साफ इशारा करते हैं कि महाराष्ट्र की राजनीति अगले कुछ वर्षों में नए समीकरणों की ओर बढ़ने वाली है।
ये भी जानिए : Cinema : 83 साल के अमिताभ बच्चन ने उम्र और समय पर जताया पछतावा

