Report : Prem Srivastava
नई दिल्ली: रेलवे चिल्ड्रेन इंडिया द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में चेयरपर्सन श्री हरभजन सिंह ने दिल्ली पुलिस के उन कर्मियों को विशेष सम्मान प्रदान किया जिन्होंने पिछले वर्ष रेल परिसरों में सैकड़ों बच्चों को तस्करी, शोषण और अन्य खतरों से बचाकर मानवता की मिसाल पेश की।
कार्यक्रम में उपस्थित दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों, विशिष्ट अतिथियों और रेलवे चिल्ड्रेन इंडिया की टीम को संबोधित करते हुए श्री हरभजन सिंह ने कहा कि यह सम्मान केवल उत्कृष्ट कार्य के लिए नहीं है, बल्कि उन दुर्लभ गुणों — करुणा, साहस, संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा — को सलाम है जो वर्दी के पार जाकर एक बच्चे का जीवन बदलते हैं।

उन्होंने बताया कि देश के व्यस्त रेलवे नेटवर्क, विशेषकर दिल्ली में, हर दिन हजारों बच्चे खोए हुए, भयभीत, तस्करी के शिकार या शोषण से भागकर स्टेशन पर पहुंचते हैं। ऐसे में दिल्ली पुलिस की सतर्कता कई बच्चों के लिए सुरक्षा की पहली दीवार बनती है।
चेयरपर्सन ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने प्लेटफॉर्म पर भटके बच्चों, डर से सहमी लड़कियों, संदिग्ध गतिविधियों और तस्करी जैसे मामलों को पहचानने व तत्काल कार्रवाई करने में असाधारण संवेदनशीलता दिखाई है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पुलिस कर्मियों द्वारा बच्चों को भोजन कराना, उन्हें समझाना, दस्तावेज़ी प्रक्रिया में घंटों सहयोग करना और उनकी सुरक्षा की व्यक्तिगत स्तर पर चिंता करना—ये मानवीय पहलू अक्सर सुर्ख़ियों में नहीं आते, लेकिन बच्चों के जीवन में स्थायी छाप छोड़ते हैं।
पिछले वर्ष दिल्ली पुलिस की रेलवे यूनिट और पीसीआर टीमों ने सैकड़ों बच्चों को बचाया, जिनमें कई अपने परिवारों से मिल गए, कई सुरक्षित गृहों में भेजे गए और कई को शिक्षा व पुनर्वास की नई राह मिली।
श्री हरभजन सिंह ने कहा कि रेलवे चिल्ड्रेन इंडिया और दिल्ली पुलिस की साझेदारी बच्चों के संरक्षण की एक मजबूत नींव है। आगे चलकर आउटरीच विस्तार, संयुक्त प्रशिक्षण, तकनीक आधारित ट्रैकिंग और पुनर्वास की बेहतर योजनाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा, “जिस बच्चे को आपने बचाया है, वह बड़ा होकर कुछ भी बनेगा। शिक्षक, डॉक्टर, कलाकार… लेकिन सबसे पहले वह बड़ा होगा, क्योंकि आपने उसे बचाया। आपने सिर्फ कर्तव्य नहीं निभाया, आपने मानवता निभाई है। कार्यक्रम का समापन “जय हिन्द” के नारे और बच्चों की सुरक्षा एवं सम्मान की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ।





