BY: Yoganand Shrivastva
ग्वालियर। शहर में साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आबकारी विभाग की सेवानिवृत्त अधिकारी हर्षा आहूजा के बैंक खाते से करीब तीन लाख रुपये ठगों ने उड़ा दिए। हैरानी की बात यह है कि न तो उन्होंने किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक किया, न किसी को ओटीपी बताया और न ही उनके फोन पर कोई संदिग्ध कॉल या मैसेज आया।
कैसे हुई ठगी
साइबर सेल की शुरुआती जांच में पता चला कि महिला के व्हाट्सऐप पर “ऑटो मीडिया डाउनलोड” फीचर ऑन था। ठगों ने उनके नंबर पर एक एपीके फाइल भेजी, जो स्वतः ही मोबाइल में डाउनलोड हो गई। इसी फाइल के जरिए ठगों को फोन का पूरा एक्सेस मिल गया और उन्होंने खाते से रकम ट्रांसफर कर दी।
बैंक ने फोन कर दी जानकारी
घटना का खुलासा तब हुआ जब बैंक मैनेजर ने खाते में न्यूनतम बैलेंस न होने पर फोन किया। इसके बाद हर्षा आहूजा ने तुरंत अकाउंट चेक किया तो पूरा बैलेंस खाली मिला। उन्होंने तुरंत साइबर क्राइम शाखा में शिकायत दर्ज कराई।
7 बार में निकाली गई रकम
साइबर जांच से पता चला कि 25 सितंबर से 27 अक्टूबर के बीच 7 बार में पैसे निकाले गए।
पहली बार ₹1.20 रुपये का ट्रायल ट्रांजेक्शन किया गया, इसके बाद क्रमशः ₹50,000, ₹49,900, ₹50,000, ₹49,900, ₹50,000 और ₹49,900 रुपये ट्रांसफर किए गए। सभी लेन-देन यूपीआई माध्यम से किए गए थे, लेकिन किसी भी ट्रांजेक्शन का अलर्ट मैसेज महिला को नहीं मिला।
जून में खोला था खाता
जीवाजीगंज निवासी हर्षा आहूजा ने जून 2025 में यूनियन बैंक में खाता खोला था। पहले उन्होंने एक लाख रुपये जमा किए थे, बाद में दो लाख और डाले। सितंबर में पति की तबीयत खराब होने के कारण वे अस्पताल में थीं, उसी दौरान ठगों ने खाते से रकम निकाल ली।
साइबर क्राइम विभाग की कार्रवाई
साइबर क्राइम थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह कुशवाह ने बताया कि बैंक और यूपीआई ट्रांजेक्शन की तकनीकी रिपोर्ट मांगी गई है। उनका कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में बिना किसी यूजर की गलती के पैसे निकलना संभव नहीं होता। यदि जांच में यह स्पष्ट होता है कि पीड़िता की कोई गलती नहीं थी, तो बैंक को पूरा धन लौटाना होगा।
सावधानी ही सुरक्षा है
साइबर विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि व्हाट्सऐप या किसी भी ऐप पर “ऑटो मीडिया डाउनलोड” फीचर बंद रखें और अज्ञात स्रोतों से आने वाली फाइल या लिंक को कभी डाउनलोड न करें।





