World Population Day : शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, विकास के आधार,क्या पर्याप्त है स्किल डेवलपमेंट की रफ्तार ?
World Population Day : आबादी के मामले में भारत चीन को पीछे छोड़कर दुनिया में अव्वल हो गया है, लेकिन सवाल है, क्या सबसे ज्यादा आबादी वाला देश होना गर्व की बात है या तनाव को बढ़ाने वाली ? हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है।इसका उद्देश्य केवल बढ़ती आबादी पर चर्चा करना नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, लैंगिक समानता और मानव विकास जैसे मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना है। इस वर्ष भी दुनिया के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि बढ़ती आबादी को चुनौती माना जाए या मानव पूंजी में बदलकर विकास की ताकत बनाया जाए। भारत 2023 में चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन गया था। दुनिया का लगभग हर छठा व्यक्ति भारतीय है।

World Population Day : भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में भी शामिल है। करोड़ों युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और महत्वाकांक्षा भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाने का दम रखती है, यही युवा स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं, नवाचार कर रहे हैं, सेना से लेकर विज्ञान और खेल तक देश का नाम रोशन कर रहे हैं। लेकिन दूसरी तस्वीर भी उतनी ही गंभीर है। बेरोज़गारी, कौशल की कमी, पलायन, नशे की बढ़ती समस्या और डिजिटल युग की नई चुनौतियां इस युवा शक्ति के सामने बड़ी बाधाएं बनकर खड़ी हैं। माना जा सकता है बढ़ती आबादी दोनों है, ताकत भी और चुनौती भी।
World Population Day : यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम इसका प्रबंधन कैसे करते हैं। युवाओं की बड़ी संख्या एक जनसांख्यिकीय लाभांश है। लेकिन, बिना अच्छी शिक्षा और नौकरियों के, यह बोझ बन सकती है। और यदि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल और रोजगार मिले तो यही आबादी आर्थिक विकास की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत बनेगी या सबसे बड़ी चुनौती ? क्या हम अपने डेमोग्राफिक डिविडेंड का पूरा लाभ उठा पाएंगे, या यही अवसर भविष्य की सबसे बड़ी परीक्षा बन जाएगा ?

