Wheat Procurement Record : किसान कल्याण वर्ष, मोहन सरकार का मिशन,समृद्ध किसान, समृद्ध मध्यप्रदेश का विजन
Wheat Procurement Record : मध्यप्रदेश, किसान कल्याण वर्ष के रूप में सफलता की नई इबारत लिख रहा है। वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में घोषित करने के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में लगातार किसान कल्याण के कार्य किये जा रहे हैं। सिर्फ किसान ही नहीं बल्कि गरीब युवा महिला सशक्तिकरण पर भी सरकार का फोकस है। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी का नेतृत्व में मुख्यमंत्री की कार्यकुशलता का ही परिणाम है कि आज कृषि के क्षेत्र में प्रदेश नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। मध्यप्रदेश में किसान कल्याण वर्ष को सरकार की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में कई योजनाओं और फैसलों को तेजी से लागू किया, जिसका असर खेती, सिंचाई, उपार्जन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। इसी का नतीजा है कि मध्यप्रदेश ने गेहूं उपार्जन में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। और अब गेहूं उपार्जन में एमपी नंबर वन है। प्रदेश ने गेहूं उपार्जन में देशभर में नया रिकॉर्ड बनाया है।
Wheat Procurement Record : इस ऐतिहासिक सफलता पर संतोष और प्रशन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश में किसानों से 104 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की रिकॉर्ड खरीदी की गई है। गेहूं उपार्जन के मामले में प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है।इस वर्ष लघु एवं सीमांत किसानों से प्राथमिकता के साथ गेहूं खरीदी का निर्णय लिया गया, जिससे लाखों अन्नदाताओं को लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार किसान हित, कृषि विकास और ग्रामीण समृद्धि के लिए निरंतर संकल्पित होकर कार्य कर रही है।सरकार इस सफलता को समृद्ध किसान, समृद्ध मध्यप्रदेश के विजन की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। मध्यप्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की रिकॉर्ड खरीदी ने किसानों को आर्थिक मजबूती दी है।
Wheat Procurement Record : सरकार का दावा है कि किसानों को समय पर भुगतान, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, फसल संरक्षण और कृषि आधारित अधोसंरचना पर विशेष फोकस किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार किसान हितैषी फैसलों को लेकर सक्रिय नजर आए। ग्रामीण क्षेत्रों में संवाद, कृषि योजनाओं की मॉनिटरिंग, उपजमंडियों का औचक निरीक्षण और प्रशासनिक स्तर पर तेजी को उनकी कार्यकुशलता से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार ने खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के उद्देश्य से तकनीक, भंडारण और बाजार व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया है।।
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