Report: Ratan kumar
Jamtara स्थानीय समाहरणालय परिसर में गुरुवार को मत्स्य विभाग की ओर से ‘मत्स्य विपणन योजना’ के तहत एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रवि आनंद ने चयनित मत्स्य विक्रेताओं के बीच मत्स्य किट का वितरण किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य जिले में मछली के कारोबार को अधिक संगठित, स्वच्छ और आधुनिक बनाना है।
Jamtara 95 प्रतिशत अनुदान पर मिली 15 हजार की किट
मत्स्य विभाग द्वारा निर्धारित 20 के लक्ष्य के विरुद्ध चयनित खुदरा विक्रेताओं को यह सहायता प्रदान की गई। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका भारी-भरकम अनुदान है:
- लागत और लाभ: प्रत्येक किट की कीमत लगभग 15,000 रुपये है, जिसे सरकार द्वारा 95 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराया गया है।
- किट में क्या है खास? विक्रेताओं को कुल 11 प्रकार की आवश्यक सामग्रियां दी गई हैं, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक तराजू, बड़ा छाता, बैठी (मछली काटने का औजार), डस्टबीन, एप्रन और अन्य उपकरण शामिल हैं।
Jamtara “गुणवत्ता और स्वच्छता से समझौता नहीं”: उपायुक्त
उपकरणों का वितरण करते हुए उपायुक्त रवि आनंद ने विक्रेताओं को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि:
- हाईजेनिक बिक्री: मछली की बिक्री पूरी तरह से साफ-सुथरे और हाईजेनिक तरीके से होनी चाहिए।
- उपभोक्ता हित: उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाली मछली मिले, यह सुनिश्चित करना विक्रेताओं की जिम्मेदारी है।
- रख-रखाव: उन्होंने विक्रेताओं से इन आधुनिक उपकरणों का सही इस्तेमाल और उचित रख-रखाव करने की भी अपील की।
Jamtara प्रशासनिक अधिकारियों की रही मौजूदगी
इस कार्यक्रम के दौरान जिले के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से:
- अपर समाहर्ता पूनम कच्छप
- जिला पंचायत राज पदाधिकारी पंकज कुमार रवि
- जिला मत्स्य पदाधिकारी रितु रंजन
इस किट के मिल जाने से अब स्थानीय बाजारों में मछली विक्रेताओं को धूप और बारिश से सुरक्षा मिलेगी, वहीं डिजिटल तराजू के इस्तेमाल से ग्राहकों को सही वजन का भरोसा भी मिलेगा।





