रिपोर्ट – प्रेमपाल सिंह
Firozabad उत्तर प्रदेश की ‘सुहागनगरी’ के नाम से मशहूर फिरोजाबाद का कांच और चूड़ी उद्योग एक बार फिर बड़े संकट के घेरे में है। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर अब यहां की फैक्ट्रियों की चिमनियों पर दिखाई देने लगा है। गैस आपूर्ति में अचानक हुई भारी कटौती ने कांच पिघलाने वाली भट्टियों की रफ्तार थाम दी है, जिससे हजारों परिवारों के रोजगार पर तलवार लटक गई है।
Firozabad 20 प्रतिशत गैस की कटौती, उत्पादन ठप
जानकारी के अनुसार, फिरोजाबाद के कांच और चूड़ी उद्योग को मिलने वाली प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में लगभग 20 प्रतिशत की कटौती कर दी गई है। जिले में वर्तमान में 200 से अधिक कांच इकाइयां संचालित हैं, जिन्हें सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रतिदिन लगभग 15 लाख घनमीटर गैस की जरूरत होती है। आपूर्ति कम होने से भट्टियों का तापमान बनाए रखना और उत्पादन जारी रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
Firozabad “16 घंटे की निरंतर प्रक्रिया, अब चलाना मुश्किल”
चूड़ी कांच उद्योगपति विनय कुमार गोयल ने उद्योग की पेचीदगियों को साझा करते हुए बताया कि कांच निर्माण कोई साधारण प्रक्रिया नहीं है। कांच को पिघलाने में ही लगातार 16 घंटे का समय लगता है, जिसके बाद चूड़ियां आकार लेना शुरू करती हैं। गैस की कमी के कारण इस निरंतर प्रक्रिया को जारी रखना असंभव होता जा रहा है।
- अतिरिक्त बंदी: रविवार को साप्ताहिक बंदी के अलावा, अब गैस की किल्लत के चलते कार्य दिवसों में भी उत्पादन रोकना पड़ रहा है।
Firozabad हजारों मजदूरों के सामने रोटी का संकट
फिरोजाबाद की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से कांच उद्योग की धुरी पर टिकी है। यदि गैस संकट जल्द दूर नहीं हुआ, तो:
- कारखानों पर ताले: कई छोटी और मध्यम इकाइयां स्थायी रूप से बंद होने की कगार पर पहुंच जाएंगी।
- बेरोजगारी: उद्योग से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हजारों दिहाड़ी मजदूरों और कारीगरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
- बाजार पर असर: उत्पादन घटने से चूड़ियों और कांच के अन्य सजावटी सामानों की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है।





