ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Swiggy से खाना मंगाना अब पहले से महंगा हो गया है। कंपनी ने प्लेटफॉर्म फीस में 17% की बढ़ोतरी की है। अब हर ऑर्डर पर ग्राहकों को ₹12 की जगह ₹14 फीस देनी होगी।
कंपनी ने यह कदम फेस्टिव सीजन के दौरान बढ़ते ऑर्डर्स और अपने मुनाफे को मजबूत करने के लिए उठाया है।
कब शुरू हुई थी प्लेटफॉर्म फीस?
- अप्रैल 2023 में स्विगी ने पहली बार प्लेटफॉर्म फीस शुरू की थी।
- शुरुआत में यह केवल ₹2 थी।
- धीरे-धीरे इसे कई बार बढ़ाया गया और पिछले साल न्यू ईयर पर इसे ₹12 कर दिया गया।
- अब इसे ₹14 कर दिया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि फीस बढ़ने के बावजूद ऑर्डर्स की संख्या पर कोई असर नहीं पड़ा।
कंपनी को कितना फायदा होगा?
स्विगी रोज़ाना 20 लाख से ज्यादा ऑर्डर्स डिलीवर करती है। ऐसे में 2 रुपए बढ़ने से-
- दैनिक इनकम: ₹2.8 करोड़
- तिमाही इनकम: ₹8.4 करोड़
- सालाना इनकम: ₹33.6 करोड़
यानी ग्राहकों के लिए यह बढ़ोतरी छोटी लग सकती है, लेकिन कंपनी के लिए यह बड़ा कदम है।
घाटे में क्यों है स्विगी?
स्विगी ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब कंपनी का घाटा तेजी से बढ़ा है।
- वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में स्विगी का नेट लॉस 96% बढ़कर ₹1,197 करोड़ हो गया।
- पिछले साल इसी अवधि में यह ₹611 करोड़ था।
- घाटे का मुख्य कारण क्विक कॉमर्स यूनिट Instamart में भारी निवेश है।
राजस्व में मजबूती
हालांकि घाटा बढ़ने के बावजूद कंपनी की कमाई में जोरदार इजाफा हुआ है—
- ऑपरेशंस से रेवेन्यू 54% बढ़कर ₹4,961 करोड़ हो गया (पिछले साल ₹3,222 करोड़ था)।
- पिछली तिमाही में यह ₹4,410 करोड़ था।
जोमैटो की स्थिति
स्विगी की प्रतिद्वंदी कंपनी Zomato ने भी पहली तिमाही के नतीजे जारी किए।
- कंपनी का मुनाफा 90% घटकर ₹25 करोड़ रह गया।
- हालांकि, रेवेन्यू में 70.4% की बढ़ोतरी दर्ज हुई और यह ₹7,167 करोड़ पहुंच गया।
स्विगी की प्लेटफॉर्म फीस बढ़ोतरी ग्राहकों की जेब पर थोड़ी असर डाल सकती है, लेकिन कंपनी के लिए यह अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने और प्रतिस्पर्धा में टिके रहने का बड़ा कदम है। आने वाले समय में कंपनी इस फीस को नॉन-फेस्टिव सीजन में वापस ₹12 करने का विकल्प भी रख सकती है।





